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Best Ever Essay on ''Environmental Pollution'' in Hindi | Pollution | StudentsHelper hindi

                                   पर्यावरण प्रदुषण 




आज महानगरों में निरंतर प्रदूषण बहता जा रहा है। इस वढ़त्ते प्रदूषण कै कारण हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पहु रहा है। इस समस्या पर विचार करने के लिए प्रदूषण को विभिन्न  दृष्टि से देखना होगा।

    'पर्यावरण' शब्द 'परि' तथा 'आवरण' के योग ले बना है। 'परि' का अर्थ है-चारों और तथा ' आवरण' का अर्थ है 'ढकने वाला' अर्थात् जो हमारे चारों और फैलकर हमे ढके हुए है। प्रकृति ने हमारे लिए एक स्वस्थ एवं सुखद आवरदृ का निर्माण किया था. परंतु मनुष्य ने मौलिक सुखों की होड़ से उसे दूषित कर दिया हैं। वर्तमान समय में शहरी सप्यत प्रदूषण को समस्या से घिरी हुई है। जैसै-जैले वैज्ञानिक उपकरण बढते जा रहे हैं, वैले-वैसै प्रदूषण का खतरा बढता जा रडा है। पर्यावरण के इस प्रदूषण से लोगों का जीवन दूभर होता जा रहा है। सरकार भी इस समस्या के प्रति जागरूक प्रतीत होती है।

     प्रदूषण के कारणों की खोज करने पर प्रतीत होता है कि अथाधुध वृक्षो की कटाई, जनसंख्या यें अत्यधिक बृदूधि, ब्लोगों का नियमित फैलाव, चिमनियों से आबादी के मध्य धुआँ उगलना एवं यातायात के साधनों कौ अभूतपूर्व घृदृधि आदि तो इसके लिए जिम्मेदार हैं। कारखानों का रासायनिक जल नदियों ने' डाल दिया जाता है। शहरों का गंदा पानी दिना साफ किए हुए नदियों में मिता दिया जाता है। जहाजो दुवारा समुद्रो में तेल गिरा दिया जाता है। वाहन धुआँ छोडते हैं और वायुमंडल को प्रदूषित करते हैं। प्रदूषण से अनेक बीमारियाँ पनपती हैं।

     प्रदूषण कई प्रकार का होता है…
   

     ( 1) जल  प्रदूषण,
     (2) वायु प्रदूषण,
     (3 ) भूमि प्रदूषण,
     (4) ध्वनि प्रदूषणा

   जल मनुष्य की बुनियादी आवश्यकता है। स्वच्छ एवं निरापद पीने का थानी न मिलने के कारण अथिकाश लोग गभीर रोगों के शिकार हो रहै हैं। जल प्रदूषण के लिए अधिकतर कारखाने जिम्मेदार हैं। जल में अनेक विषाक्त तत्व मिलकर उसे अनुपयोगी बनाते हैं।

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 वायु में भी प्रदूषण होता है। बसों दुवारा छोड़। गया धुआँ तथा कारखानों को चिमनियों से निकला धुआँ वातावरण को दूषित बनाता है। वातावरण में आँक्सीजन की मात्रा बढाने के लिए वृक्षारोपण को प्राथमिकता दो जानी चाहिए। वृक्ष आंक्सीजन छोड़त्ते हैं और कार्बन डाइअक्तिन्दड लेते हैं, अत: यह चक्र ठीक वना रहता है। वनों के संरक्षण एवं संवर्धन दुवारा वायु प्रदुषण को रोका जा सकता है।


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ध्वनि प्रदूषण भी शहरों में बढता जा रहा है। बसों के हॉर्न तथा मशीनों के चलने से यह प्रदूषण बढता जा रहा हैं। इससे बहरेपन का खतरा वढ़ता है। इससे उच्च रक्तचाप, तेज सिरदर्द. अनिद्रा आदि रो।। भी हो सकते है। इस पर भी कानूपाया जाना जरुरी है।


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भूमि  को स्वच्छ रखना चाहिए। हरियाली बनाए रखने का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। थूल-मिदृटी उडने सै भी प्रदूषण चहता हैं। इस पर मी काबू पाना चाहिए।

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             इस प्रदूषण को रोकने में हमारी भूमिका झा प्रकार हो सकती हैं :
             -  हम अधिकाधिक वृक्ष लगाएँ ताकि वातावरण स्वच्छ रह सके और प्रदूषण का खतरा टल जाए।
             -  नदियों के जल में गंदी चीजें न बहाएँ। उम्हें रबच्छ एवं पवित्र बनी रहने दें।
             -  ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए त्तेज संगीत न बजाएँ, हॉर्न भी कम बजाएँ।

पर्यावरण के प्रति हमे' सचेत रहना होगा। पर्यावरण को शुटूध बनाकर हम अपना ही भला काते हैं। इससे हमारा स्वास्थ्य ठीक रहेगा। हमें समी प्रकार के प्रदूषण से बचकर रहना चाहिए।




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